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भारतवर्ष के हिमाचल प्रदेश में "राजस्व विभाग" जिसका पुरातन नाम उर्दू भाषा में "माल मैकहमा" था आजादी के बाद इस विभाग का नाम "राजस्व विभाग" कर दिया गया आजादी से पहले रियासत काल में भूमि किसानों के पास "लगान" पर खेती-बाड़ी करने के लिए देते थे वही रियासत का मुख्य आय का मुख्य स्रोत था अब इस विभाग पास केवल "भूमि अभिलेख" का कार्य रह गया है तथा पूरे भारतवर्ष में "मीट्रिक बंदोबस्त" की आवश्यकता है जिसके लिए भारत सरकार को "भूमि सुधार मंत्रालय" का गठन करना चाहिए तथा पर्याप्त बजट का प्रावधान करना चाहिए ताकि पूरे भारतवर्ष में एक ही पैमाइश और पैमाना तथा कर्मचारियों के पद नाम एक जैसे हो सके??????????????????
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भारतवर्ष के हिमाचल प्रदेश में “राजस्व विभाग” जिसका पुरातन नाम उर्दू भाषा में “माल मैकहमा” था आजादी के बाद इस विभाग का नाम “राजस्व विभाग” कर दिया गया आजादी से पहले रियासत काल में भूमि किसानों के पास “लगान” पर खेती-बाड़ी करने के लिए देते थे वही रियासत का मुख्य आय का मुख्य स्रोत था अब इस विभाग पास केवल “भूमि अभिलेख” का कार्य रह गया है तथा पूरे भारतवर्ष में “मीट्रिक बंदोबस्त” की आवश्यकता है जिसके लिए भारत सरकार को “भूमि सुधार मंत्रालय” का गठन करना चाहिए तथा पर्याप्त बजट का प्रावधान करना चाहिए ताकि पूरे भारतवर्ष में एक ही पैमाइश और पैमाना तथा कर्मचारियों के पद नाम एक जैसे हो सके??????????????????
January 26, 2026
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